Teachers poems in Hindi

नमस्कार दोस्तों हमने 8 बेस्ट Teachers poems in Hindi शिक्षक पर कविताएं लिखी है शिक्षक और शिष्य के बीच क्या संबंध होते हैं और शिक्षक के जीवन की कठिनाइयां।

शिक्षक का प्यारअपने बच्चों के प्रति अपने शिष्य के प्रति इस कविता की खास बात यह है कि यह कविता शिक्षकों और बच्चों की समान भागीदारी पर आधारित है।

Teachers poems in Hindi

1. शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं 
*गुरु*
हृदय नभ मंडल
प्रभु सा वंदन
है गुरु चरणों में अभिनंदन
अज्ञान के अंधेरे में
दीपक समान प्रबंधन
प्रथम गुरु मां पिता को वंदन
निस्वार्थ निश्छल हृदय लिए
सागर सा ज्ञान लिए
सुगंधित मानो चंदन
धूमिल होते राहों पर
उंगली थाम
सही गलत का मंथन
सूरज सा तेज
चंदा सी शीतलता
ले शरण गुरु चरणों में
सहज सरल हो जीवन
गुरु गोविंद
गोविंद गुरु
दोनो एक समान
असमंजता में
देते हैं वही ज्ञान

– शोमिता

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2. शिक्षक पर कविता
आदर्शों की मिसाल बनकर
बाल जीवन निखरता शिक्षक
सदा बहार फूल सा खिल कर
महक और महकाता शिक्षक
गुरु ज्ञान की दीप ज्योति से
मन आलोकित कर देता शिक्षक
जो धैर्य का पाठ पढाये
संकट में हंसना सिखाये
वहीं सच्चा शिक्षक
पग पग पर परछाईं सा साथ निभाए
वहीं सच्चा शिक्षक
जिसे देख आदर से सर झुक जाए
वहीं सच्चा शिक्षक
जो बनाए हमे इंसान
और दे सही गलत की पहचान
वहीं सच्चा शिक्षक
देश के उन निर्माताओं को
हम करते शत शत नमन

– ज्योति देशमुख

 

 

 

3. शिक्षक दिवस” पर शिक्षकों को विशेष नमन

अस्थि -चर्म देहन को, कंचन बनाय रह्यो,
खोल पट खोपड़ी कै, मन चिंतन रमाय रह्यो ।
होती नहीं लोचन में, लखै की गति ऐसी,
तुम्हही ही गुरु हमें ,सब बतिया बताय रह्यो ।।
सपन सलोने देखन, तुमही बताय रह्यो,
कर का करम साधन,तुमही समझाय रह्यो ।
जीवन – मरम काहै, मारग दिखाय हमें,
अंखियन से ओझल गुरु, सत् चमकाय रह्यो ।।
तन का विधान, मन अनुपम बताय रह्यो,
बुझी-बुझी तबीयत को, प्रफुल्लित बनाय रह्यो ।
तुम्हरी ही रोशनी से, हम सब रोशन आहैं,
रवि बन गुरु, हम सबहीं पर छाय रह्यो ।।
ज्ञान – लगन मन, ऐसई लगाय रह्यो,
जैसेई दुइ चीजन बिच, सुलेशन लगाय रह्यो ।
सीखन की ललक मन, ऐसन उमड़ रही ,
जैसन कोई लकड़ी, गुरु हमही सुंघाय रह्यो ।।
विनती हमार गुरु-कृपा, ऐसही बनाय रह्यो,
मूरख समझ हमैइ, गुरु मारग दिखाय रह्यो ।
भटक न जावैं कहीं, अपने करम से गुरु ,
धरम हमार का है , गुरु, हमई समझाय रह्यो ।।

©Arun Kumar ‘बंजर’

 

 

4. निजी शिक्षक की वेदना 

बो देता हैं ज्ञान जो शिक्षक
हरा भरा हो जाता पेड़,
लाखों करोड़ों बीजों का
फिर लगा देता जो ढेर l
गुरु बिन मुक्ति नही
कह गए ज्ञानी संत कबीरा l
इस रिक्ति की पूर्ती नही,
खोज लो जग का कोई सिरा l
आज आपदा आई ऐसी
हुआ माली ही लाचार,
सींचे कैसे बीजों को ज़ब
सामाजिक दूरी हुई स्वीकार l
शिक्षा नही व्यापार मगर ,
है उद्यम ये फ़ैल रहा l
पालक और व्यवस्थापक के बीच
कारोबार तो है चल रहा l
विद्यालय हैं बंद आज,
तो लागु हुए नये नियम l
नई परंपरा के नये उपकरण
मोबाइल लैपटॉप के हुए प्रबंध l
महामारी, तालाबंदी से
चारो तरफ है हाहाकार l
संक्रमण और भय की आफत
है प्राइवेट टीचर को भी हज़ार l
किराया, बिल, राशन दवाइयां
उनकी भी हैं कई व्यवस्थाएं,
छोटी बड़ी जरूरतें उस पर
आर्थिक तंगी की समस्याएं l
इन हालातों मे भी निरंतर
जूझ रहा , वो शिक्षक है,
ऑनलाइन तकनीक, रणनीति,
समझ बूझ रहा वो शिक्षक है l
क्लास कभी टेस्ट, और कभी क्विज
अतिरिक्त पाठयक्रम गतिविधियां l
घर मे ही दे दी बच्चों को
स्कूल जैसी ही दुनिया l
वर्क फ्रॉम होम व्यवस्था मे
निरंतर स्कूल का है अब काम l
घर पर रहते हुए भी
प्राइवेट टीचर , हुए गुलाम l
जो मेहनत स्कूल मे थी
लॉकडाउन मे हुई डबल,
और जो हुई चूक कँही तो ,
निलम्बित किये जाने का भी डर l
काम तो अक्सर है जिनको
तनख्वाह से भी ज्यादा,
उनके लिए ही बनी समाज मे,
नही कोई व्यवस्था l
ये कैसी हैं विवशता,
स्कूल नही तो फीस नही l
जाने अनजाने दे रहे हैं
हम उन्हें ऐसी टीस कई l
काम नही तो दाम नहीं
रोगी हुई है मानसिकता
उनका दर्द, विषाद अवसाद
क्यों किसी को नहीं दिखता l
दिया सफल योगदान,
भारत के निर्माण मे l
रुकावट हुए हैं हम,
उनके ही कल्याण मे l
आयुर्वेद के सार हैं शिक्षक
इतिहास के जानकार ,
संस्कृत के संस्कार हैं शिक्षक
भाषा के भण्डार l
इनके कर्जदार हैं हम,
अपना फ़र्ज निभाएं सब l
ध्यान दें इनके हक पर, भी
काम इनके भी आएं अब l

स्वरचित by Dr. JYOTI DWIVEDI

 

 

 

 

5. कविता शिक्षक
आदर्शों की मिसाल बनकर
बाल जीवन निखरता शिक्षक
सदा बहार फूल सा खिल कर
महक और महकाता शिक्षक
गुरु ज्ञान की दीप ज्योति से
मन आलोकित कर देता शिक्षक
जो धैर्य का पाठ पढाये
संकट में हंसना सिखाये
वहीं सच्चा शिक्षक
पग पग पर परछाईं सा साथ निभाए
वहीं सच्चा शिक्षक
जिसे देख आदर से सर झुक जाए
वहीं सच्चा शिक्षक
जो बनाए हमे इंसान
और दे सही गलत की पहचान
वहीं सच्चा शिक्षक
देश के उन निर्माताओं को
हम करते शत शत नमन

ज्योति देशमुख

 

 

Short poems for teachers in Hindi

6. शिक्षक
एक शिक्षक महत्व अपना दिखलाता हैं।
समाज को बेहतर बनाने का जिम्मा वो उठाता हैं।।
कोरे पन्नों और कलम में भी दम भर देता हैं।
शिक्षा की ताकत का ही दुनिया को बोलबाला हैं।।…१
कभी डाटता हैं हक़ से, कभी प्यार से समझाता हैं।
हर मुश्किल से कैसे लड़ना हैं वो ये सिखलाता हैं।।
वक्त के बदलते रुख से रुबरु हमें कराता हैं।
माता पिता से बड़ा फ़र्ज वो जीवन में निभाता हैं।।…२
भूले बिसरे आदर्शो को बार बार दोहराता हैं।
उनकी मिसाल देकर प्रेरक आयाम बनाता हैं।।
बच्चों का मन जो कोरा कागज था पहले।
मन पर ज्ञान की अमिट छाप छोड़ जाता हैं।।…३
जाति, धर्म और समाज से ऊपर उठता हैं।
समाज के हर एक वर्ग को एक साथ बिठाता हैं।।
प्रेम से रहना हैं जग में ये पाठ सभी को पढ़ाता हैं।
धन से पहले ज्ञान का मोल हैं सब को यह समझाता हैं।।…४
जिंदगी का उतार चढ़ाव हर पल गुरु की याद दिलाता हैं।
गुरु से मिला ज्ञान हर मुश्किल से पार लगाता हैं।।
माता पिता से पहले गुरु का स्थान सबसे ऊपर आता हैं।
दुनिया में सभी से वो आदर और सम्मान हमेशा पाता हैं।।…५
गुरु के ज्ञान से भरा हर कोई अपनी राह बनाता हैं।
नित नए मुकाम हासिल कर नई मंजिल पाता हैं।।
पर गुरु अपनी जगह खुद को ठहराता हैं।
फिर नित नई पीढ़ी को वो आगे राह दिखाता हैं।।…६

—अनुज गुप्ता

 

 

 

7. शिक्षक के कई सवाल  हैं जवाब मिलता नहीं

शिक्षा का अधिकार मिलने से
बच्चे शिक्षित होते हैं
या शिक्षक के पढ़ाने से
या मध्यान्ह भोजन खाने से?
हुक्म सिर आंखों पर
होड़ मची है शिक्षकों में
सेमिनार अटेंड करने की।
ज्ञान सेमिनार से बढता है
या वहां उपस्थिति दर्ज़
सर्टिफिकेट डाउनलोड करने से?
‌छात्रों का सही मार्ग दर्शन-
उनकी जिज्ञासा और
मौलिक सोच को बढ़ाना ज़रुरी है
या उनका परीक्षा में
केवल अंक पाना ज़रूरी है?
सही कार्य प्रणाली से
और ईमानदारी से देश आगे बढ़ता है
या डाटा गिनाने से
वाद-विवाद करने से
या जोड़ तोड़ की राजनीति से?
सवाल कई हैं, जवाब मिलता नहीं।।

शेफालिका
रांची, झारखंड।

 

 

 

 

8. तुम मत पूछो शिक्षक कौन है?

शिक्षक न कोई पद है,
शिक्षक न कोई आय है,
शिक्षक न कोई कर्म है,
न शिक्षक कोई धर्म है,
शिक्षक तो ईश्वर का वरदान है,
शिष्य के लिए ज्ञान पाने का माध्यम है।
शिक्षक कभी मित्र बन जाता है,
तो कभी मां कभी पिता का हाथ है,
इसलिए साथ न रहकर भी
ताउम्र हमारे आसपास है।
शिक्षक कभी नायक, तो कभी खलनायक,
कभी विभूषण बन जाता है।
हमारे लिए न जाने कितने मूखोटे
शिक्षक स्वय पहन लेता है।
पर उनका एक ही लक्ष्य हमें
ज्ञान दिलाना रह जाता है।
शिक्षक किसी धर्म से ऊपर है,
अपने शिष्यों के लिए स्वय धर्म है।
शिक्षक अनुभूत सत्य है,
शिष्यों के लिए मानो कोई परिक्षता है।
तुम मत पूछो शिक्षक कौन है?
शिक्षक न कोई पद है,
शिक्षक न कोई आय है,
शिक्षक न कोई कर्म है,
शिक्षक न कोई धर्म है,
शिक्षक तो ईश्वर का वरदान है,
शिष्यों के लिए ज्ञान पाने का माध्यम है।

बिवेक कामी

 

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