Short poems about nature

प्रकृत ने Short poems about nature हमें हमारी जरूस्तो के हर एक संसाधन उपलब्ध कराये है चाहे वह पीने के लिए पानी हो या सोने के लिए छत, सबकुछ हमे इस अद्वितीय प्रकृत ने ही दिया है|

प्रकृत की सुंदरता तो देखते ही बनती है| और इसीलिए आज हम प्रकृत की अद्वितीय सुंदरता को एक खूबसूरत 10 Short poems about nature के माध्यम से लेकर आये है| दोस्तों प्रकृति की सुंदरता अदभुत है, इसके सुंदरता की तुलना किसी भी अन्य चीजों से नहीं की जा सकती क्यूंकि प्रकृत से ही हम है और ये पूरा संसार है|

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Poem on Life in Hindi

Short poems about nature

दोस्तों प्रकृत बहुत ही सुन्दर है इसके वन उपवन फल फूल मौसम सब देखते ही बनते है| भले ही आज इंसानो ने प्रकृत को अपनी-अपनी सुविधा की अनुशार आलिशान महलो एवं मकानों इत्यादि में बाँट लिया है उसके बावजूद प्रकृत की सुंदरता कभी कम नहीं हुई है|

ये प्रकृति शायद कुछ कहना चाहती है हमसे
ये हवाओ की सरसराहट
ये पेड़ो पर फुदकते चिड़ियों की चहचहाहट
ये समुन्दर की लहरों का शोर
ये बारिश में नाचते सुंदर मोर
कुछ कहना चाहती है हमसे
ये प्रकृति शायद कुछ कहना चाहती है हमसे
ये खुबसूरत चांदनी रात
ये तारों की झिलमिलाती बरसात
ये खिले हुए सुन्दर रंगबिरंगे फूल
ये उड़ते हुए धुल
कुछ कहना चाहती है हमसे
ये प्रकृति शायद कुछ कहना चाहती है हमसे
ये नदियों की कलकल
ये मौसम की हलचल
ये पर्वत की चोटियाँ
ये झींगुर की सीटियाँl
कुछ कहना चाहती है हमसे
ये प्रकृति शायद कुछ कहना चाहती है हमसे

Short poems about nature

दोस्तों यह कविता हमे सिख देती है की जैसे प्रकृति ने अपने सुंदरता को हर मौसम चाहे सर्दी गर्मी बरसात में बरकरार रखती है और दुसरो को अपने फल फूल छाँव और अपनी सादगी से सुकून शांति प्रदान करती है उसी तरह हमें भी सदैव अपने आत्मविश्वास को बनाये रखना चाहिए चाहे कितनी भी कठिनाइयाँ क्यों न आये हमेशा हर परिस्थिति का डट के सामना करना चाहिए|

माँ की तरह हम पर प्यार लुटाती है प्रकृति
बिना मांगे हमें कितना कुछ देती जाती है प्रकृति
दिन में सूरज की रोशनी देती है प्रकृति
रात में शीतल चाँदनी लाती है प्रकृति
भूमिगत जल से हमारी प्यास बुझाती है प्रकृति
और बारिश में रिमझिम जल बरसाती है प्रकृति
दिन-रात प्राणदायिनी हवा चलाती है प्रकृति
मुफ्त में हमें ढेरों साधन उपलब्ध कराती है प्रकृति
कहीं रेगिस्तान तो कहीं बर्फ बिछा रखे हैं इसने
कहीं पर्वत खड़े किए तो कहीं नदी बहा रखे हैं इसने
.कहीं गहरे खाई खोदे तो कहीं बंजर जमीन बना रखे हैं इसने
कहीं फूलों की वादियाँ बसाई तो कहीं हरियाली की चादर बिछाई है इसने.
मानव इसका उपयोग करे इससे, इसे कोई ऐतराज नहीं
लेकिन मानव इसकी सीमाओं को तोड़े यह इसको मंजूर नहीं..
जब-जब मानव उदंडता करता है, तब-तब चेतवानी देती है यह
जब-जब इसकी चेतावनी नजरअंदाज की जाती है, तब-तब सजा देती है यह.
विकास की दौड़ में प्रकृति को नजरंदाज करना बुद्धिमानी नहीं है
क्योंकि सवाल है हमारे भविष्य का, यह कोई खेल-कहानी नहीं है
मानव प्रकृति के अनुसार चले यही मानव के हित में है
प्रकृति का सम्मान करें सब, यही हमारे हित में है

 

Short poems about nature

दोस्तों इस कविता में हमने प्रकृति के दर्द के विषय में समझाया है प्रकृत हम इंसानों से बहुत कुछ कहती है पर उसको महसूस करना और समझना हम इंसानों को नागवार लगता है इसलिए इस कविता के माध्यम से समझिए कि प्रकृत क्या कहती है

मुझे आश्चर्य है कि क्या प्रकृति रोती है
चुपचाप घास के मैदानों के पीछे
और चाहता है कि हम दयालु बनें
अपने लिए और पेड़ साथियों को।

मुझे आश्चर्य है कि क्या प्रकृति रोती है
हमारे द्वारा काटे गए पेड़ों के लिए
और हमारे पास लापरवाह तरीके हैं
इससे उसका ताज धूमिल हो जाता है।

मुझे आश्चर्य है कि क्या प्रकृति रोती है
अपने ही राज्य के लिए
जब मौसम अनुकूल न हो
और फल और फूल पीड़ित हैं।

तो आइए जागरूक रहें
और प्रकृति को जगह दें
जहां हम इसकी देखभाल कर सकते हैं
और प्रकृति को उसके शाही तरीके वापस दे दो

 

Short poems about nature

हमारे जीवन में जो आभाव प्रभाव है वह इस प्रकृति की ही देन हैइस कविता के माध्यम से सीखिए की प्रकृत हमारे जीवन को कितना प्रभावित करती है बचपन की यादें दिलाती हैं

हमने चिड़ियों से उड़ना सीखा,
सीखा तितली से इठलाना,
भंवरों की गुनगुनाहट ने सिखाया
हमें मधुर राग को गाना।

तेज लिया सूर्य से सबने,
चाँद से पाया शीतल छाया।
टिमटिमाते तारो को जब हमने देखा
सब मोह-माया हमें समझ आया.

सिखाया सागर ने हमको,
गहरी सोच की धारा।
गगनचुम्बी पर्वत सीखा,
बड़ा हो लक्ष्य हमारा।

हरपल प्रतिपल समय ने सिखाया
बिन थके सदा चलते रहना।
कितनी भी कठिनाई ाँ पड़े,
पर कभी न धैर्य गवाना।

प्रकृति के कण-कण में हैं
सुन्दर सन्देश समाया।
प्रकृति में ही ईश्वर ने
अपना रूप हैं.दिखाया।

Short poems about nature

हरी-भरी पगडंडियाँ जो खड़ी पहाड़ियों की ओर ले जाती थीं,

जहाँ जंगली सागौन के पेड़ ऊँचे देवदार के साथ मिश्रित होते हैं,

चॉकलेट चट्टानों के कंधों को घेरने वाले वन दिग्गज,

प्रकृति की सिम्फनी को प्रतिध्वनित किया,

ताज़ी पहाड़ की हवा जिसने शाखाओं में कंघी की,

जैसे-जैसे यह वृक्षों की चोटी को छूता है, पोषण करता है,

चट्टानी दरारों से रिसने वाली कोमल धारा,

नदी में शामिल होने के रास्ते में कंकड़ साफ किए,

मधुर मुस्कुराते हुए फूल, सिर हिलाते हुए लताएं, चहचहाते पंछी,

और बकबक करने वाले क्रिटर्स इतने जोर से और स्पष्ट हैं,

इतनी नई भाषा बोली, इतना सच्चा संदेश छोड़ गया,

कि पेड़ और जंगल मानव जाति को भविष्य की ओर ले जाते हैं!

– बेउला प्रसाद

Short poems about nature

हरियाली से ज़िन्दगी खूबसूरत,
इसीलिए कहते है चीज़ो को एवरग्रीन;
भर जाता है दिल में और भी सुकून,
जब आजाये एक रंग में दूजा रंग;
तब में सोचती हु, क्या हम इंसान भी
रह सकते है इसी तरह एक दूजे के संग?

Short poems about nature

आइए अपनी प्रकृति की रक्षा करें
सूर्य चमक रहा है,
आसमान नीला है,
पंछी उड़ रहे हैं,
और हवा बहुत ठंडी है।

माँ प्रकृति अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रही है
सुंदरता के सिवा कुछ नहीं देना,
लेकिन हम क्या कर सकते हैं?
उसे गड़बड़ कर दो।

चलो उसे सबसे अच्छा बनाते हैं
कम से कम प्रदूषण करके,
और उसकी हरी पोशाक को सुरक्षित रखें
हमारे बच्चों और बाकी के लिए।

Short poems about nature

प्रकृति, प्रकृति आपका जन्म कब हुआ था?
मुझे नहीं पता, लेकिन आप भगवान से पूछ सकते हैं
तुम हमें फल देते हो ना?
मम्म, स्वादिष्ट और स्वादिष्ट… कुछ लें, है ना?
प्रकृति, प्रकृति, सुंदर प्रकृति,
हमेशा कला शिक्षक द्वारा खींचा गया!
पहाड़ों, पहाड़ियों और घाटियों के ऊपर,
अद्भुत सूर्य आता है।
हे प्रकृति, तुम हमेशा से रहे हो,
जानवरों को जीवन देना – शेर, हिरण और भालू!
अच्छे नीले आकाश को देखो,
बादल सफेद हैं और मुझे आश्चर्य है कि क्यों!
प्रकृति, प्रकृति समुद्र और समुद्र तट,
एक शार्क है, शश… लेकिन मेरी पहुंच से बाहर!
हे प्रकृति, हमेशा के लिए रहो,
मानवता के लिए आप कहीं भी प्यार करेंगे!

Short poem about nature beauty

जहाँ अन्न की बाली हैं खूब हरियाली हैं
हजारों रंग बिखरे वह प्रकृति रानी हैं
सबके लिए यह प्रकृति सबसे न्यारी हैं

हरे-भरे वन-उपवन
झर झर करते झरना
नदियों का कलकल बहना
प्रकृति का मन को मोह लेना
बिन प्रकृति कैसे तू जी पायेगा ?

बिन माँगे फल,फूल,अन्न, जल, हवा
सब कुछ हमपर न्यौछावर करती
ऐसे जैसे प्रकृति, माँ हो हमारी।
क्या प्रकृति बिना तू जी पायेगा?
रंग-बिरंगा रूप दिखा मन बहलाती
शीतल हवा बहा हमें चैन की नींद सुलाती
बिन शीतल हवा कैसे तू जी पायेगा ?

हे ईश्वर! क्या खूब नायाब प्रकृति को बनाया
ऐसा लगे जैसे चारो तरफ अपना ही हैं रूप दिखाया
रंग-बिरंगे फूल खिले, मध्दम-मध्दम हवा चले
मिट जाए सारे तनाव हे प्रकृति माँ जब भी तेरी गोद मिले।

काट-काट हमने सभी पेड़ हैं गिराया
कई जगह साँसों के लिए हवा गवाया
प्रकृति हैं तो हम हैं, संस्कृति हैं, हमारी सभ्यता हैं
मत कर दूषित-प्रदूषित प्रकृति माता को
प्रकृति ही जीवन देती प्रत्येक प्राणी को
बिन प्रकृति कैसे तू जी पायेगा ?

नदियों की अविरलता झरनो की शीतलता
तड़पे जब भी धरती बादलों से जल हैं टपकता
अनमोल-अमूल्य प्रकृति ही सबका भरण-पोषण करती
इसकी सुरक्षा हमें ही करनी हैं यह बात तू क्यों नहीं समझता

दूषित हवा में क्या तू साँस ले पायेगा ?
जलती दोपहरी में क्या बिन छाँव रह पायेगा ?
शीतल जल बिना कैसे अपनी प्यास बुझायेगा ?
तितली नहीं होंगे बगीचे में फिर बच्चो बिन
बगीचा सुना हो जायेगा, बिन प्रकृति कैसे तू जी पायेगा ?

Famous Short poems about nature

प्रकृति में बहार आयी,
देखकर अपने प्रेमी बसंत को,
उसके मुरझाये अधरों पर
मधुर-मधुर सी मुस्कान छायी।

लगी वह डाली-डाली डोलने
कुछ शरमाई सी कुछ इठलायी सी,
अपनी अनुपम सुंदरता खोलने,
करने लगी अठखेलियाँ।

मिलकर अपने प्रेमी प्रियतम से,
रग-रग में रंग दिया बसंत ने,
उसको रंगो की झोली में
रंग रंगीले रंग में
खुश हैं दोनों हमजोली में.

 

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