Poem on flower in hindi | फूलों पर बेस्ट कविताएँ

नमस्कार दोस्तों हमने बेस्ट फूल पर कविता Poem on flower लिखी है फूल हमारे जीवन का अभिन्न अंग है इसलिए फूलों की सेवा करना उसे पालना हमारा कर्तव्य है

इसलिए इस कविता में हमने फूलों के जीवन के बारे में वर्णन किया है मुझे उम्मीद है कि यह कविता आपको बहुत अच्छी लगेगी

Good Poem on flowers in Hindi

मैं रंग बंसतिक हूं
मन‌मोहक में तो फाल्गुनी हूं
रंगों की मुझ में सृजन है
मैं ना कभी काल्पनिक हूं
मैं तितली सी हवाओं में उड़ती हूं
धरा पर जा मैं उससे मिलती हूं
मैं बासंतिक हूं मैं फाल्गुनी हूं
हरे, नांरगी ,लाल ,पीले रंगों से
प्रकृति की अद्भुत श्रृंगार करती हूं
मैं तो ऱंगो की आगाज हूं
रंगों की सृजन मुझसे
मैं फाल्गुनी मैं बांसतिक
प्रकृति की रंगों से नवश्रृंगार करती हूं
मैं पुष्प नहीं पर सतरंगी सी
हर शाख से गिरती हूं
मैं तितली सी हवाओं में उड़ती हूं
मैं खुबसूरती हूं आंखों में जा बसती हूं
मैं बासंतिक हूं, मैं मनमोहक सी
धरा पर आ श्रृंगार करती हूं

Priya Prasad

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पुष्प की अभिलाषा
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चाह नहीं, मैं सुरबाला के
गहनों में गूँथा जाऊँ,
चाह नहीं प्रेमी-माला में बिंध
प्यारी को ललचाऊँ,
चाह नहीं सम्राटों के शव पर
हे हरि डाला जाऊँ,
चाह नहीं देवों के सिर पर
चढूँ भाग्य पर इठलाऊँ,
मुझे तोड़ लेना बनमाली,
उस पथ पर देना तुम फेंक!
मातृ-भूमि पर शीश- चढ़ाने,
जिस पथ पर जावें वीर अनेक!

माखनलाल चतुर्वेदी

मेरा जीवन परोपकार में समाया है

स्वयं के लिए जीना मुझे ना आया है
मैं जब भी खिला दुनिया को महकाया है
रंगबिरंगी पंखुड़ियों से दुनिया को सजाया है

छोटा सा जीवन लेकर धरा पर आता हूँ
कली से फूल में परिवर्तित हो जाता हूँ
अनेकों रंगों और आकृतियों में पाया जाता हूँ
उपवन की शोभा में चार चाँद लगाता हूँ

हम सब पुष्पों की इंसानों की तरह
ही अलग अलग तकदीर है
किसी की दुनिया में ख़ुशियां हैं तो
किसी की झोली में ग़मों की भीड़ है

भिन्न भिन्न पुष्पों से मिलकर माला में गूंथा जाता हूँ
इस तरह एकता का महत्व मैं समझाता हूँ
यदि सब धर्म आपस में ऐसे ही मिल जाएंगे
तब एकता के एक सूत्र में सारे ही बंध जाएंगे

ख़ुशियों का अगर मैं साथी हूँ तो
ग़म में भी सबका साथ निभाता हूँ
जिस काम के लिए बुलाया जाता हूँ
उसे दिलो जान से मैं निभाता हूँ

ख़ुश हूँ मैं ,मुरझा कर तो मैं मर ही जाऊँगा
बेहतर है जीते जी किसी के काम आ जाऊँगा
एक नेक काम कर दुनिया से वापस जाऊँगा
और जीवन अपना कृतार्थ कर जाऊँगा

– रत्ना पांडे

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जिज्ञासा वश पुष्प ने पूछा बनमाली से
हे ,बनमाली,
हुआ…,क्या !
जो ,हम आज इस पथ पर बिछाये गये हैं |
कौन है -आने वाला ?
इस पथ पर -आज ,
क्या ,कोई महान व्यक्ति आने वाला है,
या ,फिर किसी देवता की सवारी,
कुछ तो बोलो तुम ,
हे , बनमाली..,
जिसके लिए ,
हम आज इस पथ पर बिछाये गये हैं |
हाथ जोड़ ,बनमाली बोला,
इस पथ पर आयेंगे वो सेनानी,
कफ़न ओढ़ , तिरंगे का -जो ,
हो गये -शहीद देश की आन पर,
उनके लिये ही -मैंने ,
पथ में सुमन बिछाये हैं -आज |
हे -बनमाली ,
मेरी इतनी इच्छा पूरी करना -तुम ,
जब वो आयें इस पथ पर -तब ,
कुछ पुष्प डाल देना तुम उनपर,
जो बिछा हुआ हूँ उस पथ पर आज ||

शशि कांत श्रीवास्तव

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