Poem in Hindi on life 6 बेस्ट जिंदगी पर कविताएँ

Poem in Hindi on life | जिंदगी पर कविताएँ दोस्तों इस पोस्ट में मैंने जिंदगी पर जिंदगी पर आधारित 6 बेस्ट कविताएं लिखी हैं जो जिंदगी में सुख दुख लाभ हानि अच्छाई बुराई जीवन के सभी अंगों को कविता के माध्यम से दर्शाया गया है

Poem in Hindi on life | जिंदगी पर कविताएँ

कभी तानों में कटेगी,
कभी तारीफों में;
ये जिंदगी है यारों,
पल पल घटेगी !!
-पाने को कुछ नहीं,
ले जाने को कुछ नहीं;
फिर भी क्यों चिंता करते हो,
इससे सिर्फ खूबसूरती घटेगी,
ये जिंदगी है यारों पल-पल घटेगी !
-बार बार रफू करता रहता हूँ,
…जिन्दगी की जेब !!
कम्बखत फिर भी,
निकल जाते हैं…,
खुशियों के कुछ लम्हें !!

-ज़िन्दगी में सारा झगड़ा ही…
ख़्वाहिशों का है !!
ना तो किसी को गम चाहिए,
ना ही किसी को कम चाहिए !!

-खटखटाते रहिए दरवाजा…,
एक दूसरे के मन का;
मुलाकातें ना सही,
आहटें आती रहनी चाहिए !!

-उड़ जाएंगे एक दिन …,
तस्वीर से रंगों की तरह !
हम वक्त की टहनी पर…,
बेठे हैं परिंदों की तरह !!

-बोली बता देती है,इंसान कैसा है!
बहस बता देती है, ज्ञान कैसा है!
घमण्ड बता देता है, कितना पैसा है !
संस्कार बता देते है, परिवार कैसा है !!

-ना राज़* है… “ज़िन्दगी”,
ना नाराज़ है… “ज़िन्दगी”;
बस जो है, वो आज है, ज़िन्दगी!

-जीवन की किताबों पर,
बेशक नया कवर चढ़ाइये;
पर…बिखरे पन्नों को,
पहले प्यार से चिपकाइये !!!

 

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Zindagi Kavita Hindi

हरिवंशराय बच्चन.. Beautiful poem बैठ जाता हूँ मिट्टी पे अक्सर………..

बैठ जाता हूँ मिट्टी पे अक्सर
क्योंकि मुझे अपनी औकात अच्छी लगती है
मैंने समंदर से सीखा है जीने का सलीक़ा,
चुपचाप से बहना और अपनी मौज में रहना ।
ऐसा नहीं है कि मुझमें कोई ऐब नहीं है
पर सच कहता हूँ मुझमे कोई फरेब नहीं है
जल जाते हैं मेरे अंदाज़ से मेरे दुश्मन क्योंकि
एक मुद्दत से मैंने न मोहब्बत बदली और न दोस्त बदले ।

एक घड़ी ख़रीदकर हाथ मे क्या बाँध ली,
वक़्त पीछे ही पड़ गया मेरे ।
सोचा था घर बना कर बैठूँगा सुकून से;
पर घर की ज़रूरतों ने मुसाफ़िर बना डाला ।
सुकून की बात मत कर ऐ ग़ालिब,
बचपन वाला ‘इतवार’ अब नहीं आता ।
शौक तो माँ-बाप के पैसों से पूरे होते हैं,
अपने पैसों से तो बस ज़रूरतें ही पूरी हो पाती हैं ।
जीवन की भाग-दौड़ में;
क्यूँ वक़्त के साथ रंगत खो जाती है ?
हँसती-खेलती ज़िन्दगी भी आम हो जाती है ।
एक सवेरा था जब हँस कर उठते थे हम,
और;
आज कई बार बिना मुस्कुराये ही शाम हो जाती है ।
कितने दूर निकल गए,
रिश्तों को निभाते निभाते;
खुद को खो दिया हमने,
अपनों को पाते पाते ।

लोग कहते है हम मुस्कुराते बहुत हैं,
और हम थक गए दर्द छुपाते छुपाते ।
खुश हूँ और सबको खुश रखता हूँ,
लापरवाह हूँ फिर भी सबकी परवाह
करता हूँ ।
मालूम है कोई मोल नहीं मेरा,
फिर भी,
कुछ अनमोल लोगो से
रिश्ता रखता हूँ ।
हरिवंशराय बच्चन

किसानों पर दर्द भरी कविता

Poem in Hindi on life | जिंदगी पर कविताएँ

Very Nice Poem About Life ,

समय चला , पर कैसे चला,
पता ही नहीं चला ,
ज़िन्दगी की आपाधापी में ,
कब निकली उम्र हमारी यारो ,
पता ही नहीं चला ,

कंधे पर चढ़ने वाले बच्चे ,
कब कंधे तक आ गए ,
पता ही नहीं चला ,

किराये के घर से शुरू हुआ था सफर अपना ,
कब अपने घर तक आ गए ,
पता ही नहीं चला ,

साइकिल के पैडल मारते हुए हांफते थे उस वक़्त,
कब से हम कारों में घूमने लगे हैं ,
पता ही नहीं चला ,

कभी थे जिम्मेदारी हम माँ बाप की ,
कब बच्चों के लिए हुए जिम्मेदार हम ,
पता ही नहीं चला ,

एक दौर था जब दिन में भी
बेखबर सो जाते थे ,
कब रातों की उड़ गई नींद ,
पता ही नहीं चला ,

जिन काले घने बालों पर
इतराते थे कभी हम ,
कब सफेद होना शुरू हो गए
पता ही नहीं चला ,

दर दर भटके थे नौकरी की खातिर ,
कब रिटायर हो गए समय का ,
पता ही नहीं चला ,

बच्चों के लिए कमाने बचाने में
इतने मशगूल हुए हम ,
कब बच्चे हमसे हुए दूर ,
पता ही नहीं चला ,

भरे पूरे परिवार से सीना चौड़ा रखते थे हम ,
अपने भाई बहनों पर गुमान था ,
उन सब का साथ छूट गया ,
कब परिवार हम दो पर सिमट गया ,
पता ही नहीं चला ,

अब सोच रहे थे अपने
लिए भी कुछ करे ,
पर शरीर ने साथ देना बंद कर दिया ,
पता ही नहीं चला

It’s reality of lifeजीवन की सच्चाई है

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Poem in Hindi on life | जिंदगी पर कविताएँ

मैं मौत से क्यों डरूँ
मैं जो हर रोज हर लम्हा मरता हूँ हजारों जिंदगियाँ..
डरता हूँ मगर जिन्दगी से
जो पैदा कर रही हर पल
एक नई मौत

यद्यपि फिर भी देखोगे तुम मुझे
रोते बिलखते आँसू बहा गिड़गिड़ाकर माँगते हुए..
चंद साँसें मौत से जिंदगी के लिए
और कुछ और नई मौतें जिंदगी से
जीने के लिए

तुम लाख फब्तियां कसते रहो मुझ पर
लाख झूठा बताओ मुझे

मगर ये निर्मम सत्य है
एकदम झूठ की तरह विशुद्ध
मुझे जिंदगी से प्यार है
मौत की खातिर ।

Poem in Hindi on life | जिंदगी पर कविताएँ

कोई तुझको समझ न पाया
क्या चीज़ तू है ऐ ज़िन्दगी ?
थक गये लोग ब़यां कर करके
समझ न आई तू ऐ ज़िन्दगी
कोई……………

सुखों का अम्बार है ये ज़िन्दगी
दुःखों का पहाड़ है ये ज़िन्दगी।
ज़हर अगर तुम पी सको तो
थोड़ी सी आसान है ये ज़िन्दगी।
कोई……………

कौन है आपना,कौन है पराया
समझ न पाते सब लोग कभी।
अपनों में ही तो गद्दार छिपे हैं।
रिसते घावों का प्रलाप है ज़िन्दगी।
कोई……………

नहीं मालूम किसकी कितनी है
साँसों का भन्डार ऐ ज़िन्दगी ?
साँसों का तानाबाना बुनना है।
किस दुनिया के पार है ज़िन्दगी?
कोई.।…………

कुछ ख़्वाब भी सुनहरे पलते हैं।
कुछ स्वप्न भी अधूरे बिख़रते हैं।
सच्चाई की दुनिया तो कड़वी है।
ख़्वाबों का मकड़जाल है ज़िन्दगी।
कोई……………

माधुरी चित्रांशी “मधु”

Poem in Hindi on life | जिंदगी पर कविताएँ

जिंदगी
जिंदगी खुद में बड़ी गहरी है,
अपने हीं रफ्तार में बहरी है l
अल्हड़ सी बीतती चली जाती है,
पकड़ो लाख पर हाथ नहीं आती है ll
यह शरीर और आत्मा का समाहार है,
प्रकृति से मिला एक उपहार है l
यह सहजता से जीने का नाम है,
न की बेचैनी से मरने का काम है ll
यह अपना निर्णय खुद लेती है,
पात्र को पुरस्कार और कुपात्र को दंड देती है l
शायद इसकी भी अपनी मजबूरी है,
जो मेरी मजबूरी से भी जरूरी है ll
-प्रवीण कुमार

Poem in Hindi on life | जिंदगी पर कविताएँ

जिनका बचपन छिने,
जवानी भूखा सोए l
जीवन की तकलीफों में ,
जो हंसी को खोए ll

होकर साधन हीन,
जुटाएं जो संसाधन l
इस प्रयास को शीला मिले,
केवल पागलपन ll

धूप में तप कर जो,
जीवन का ताप घटाता l
चरण ,आचरण के,
मानक पे सदा बढ़ाता ll

ऐसे बाधा दौड़ में,
जो है आगे बढ़ता l
वह समाज के दर्पण का ,
सुंदर छवि गढ़ता ll

इस गति में प्रगति का,
जो बनता संवाहक l
प्रकृति उस “जीवठता”का,
बनती उद्घोषक ll

 

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