6 Best Nashe Par Kavita | नशे पर कविता

यदि आप नशे पर कविता ढूंढ रहे हैं तो हमारे द्वारा 6 बेस्ट कविताएं दी गई हैं जिसे पढ़कर आप नशे का दोष और नशे का पागलपन समझ सकते हैं

वैसे तो नशा करना शरीर और समाज के लिए हानिकारक है लेकिन समझता कौन है

6 Best Nashe Par Kavita in hindi

 

हां ….मै वेश्या हूँ मै
वेश्या ….
नुचवाती हूँ देह अपनी
उतरती हूँ कपडे
होती हूँ नग्न, कई पुरुष के सामने
वासना से भरे पुरुष
टूट जाते हैं मेरी देह पर ऐसे
जैसे !
भूखा सिंह टूटता हो किसी
हिरण को देखकर….
चंद कागज के टुकडो की खातिर
देह बेंचती हूँ देह
जिसे तुम जोड़ते हो नारी के
चरित्र से…
मै वेश्या चरित्रहीन
समाज की भर्तसना / और बुराई अनेक
प्राप्त नारी…
तुम पुरषो की भूख को
तृप्त करती हूँ
तुम, संग बिस्तर पर झलकाते हो
प्यार… कामुकता से भरे
अनगिनत चुम्बन
मेरे अंग अंग पर…
और देह से देह टिकाकर
जताते हो प्रेम की परकाष्ठा…
पाने क्षणिक सुख…
उपरांत सुख के लेते ही
देते हो गाली / रंडी/ छिनार और
भी क्या क्या ….
कहते हो शर्म नहीं आती इसे
महिला होकर ..
सच !
शर्म आई थी मुझे उस दिन बहुत
जब स्कूल के शिक्षक ने
कक्षा में खिलवाड़ की थी
मेरे अंगो से…
शर्म आई थो उस दिन जब
पड़ोस के चाचा ने
जो मुझे बिटिया कहते थे
नशे में जकड़ा था मुझे..
शर्म तो उस दिन भी बहुत आई थी
जब कुछ लडको ने मेरी इज्जत को
तार तार किया था
और न्याय के लिए गई थी थाने
में रिपोर्ट लिखाने पर
लिखा लाई थी कुछ और ही
अपने बदन पर
थानेदार के हांथो….
फिर मेरी शर्म भय में बदल गई
जब पिताजी ने बेंच डाला जब
एक शौकीन शराबी को..
अब शर्म दिलेरी में बदल गई
और उसी दिलेरी से कहती हूँ
मै अपने भूखे बच्चो का पेट
भरती हूँ
वेश्या बनकर
हां वेश्या हूँ मै….
पर तुम कौन हो ??

दिल इंसान का बुरा नहीं होता।
पीकर नशे में झुम जरूर लेता,
पर हर नशा बुरा नहीं होता।
दीपक की लौ तेल की कमी से बुझता।
यूं कसूर बार हवा नहीं होता।
नम आंखों में जख्म गहरे जरूर,
यूं खामोश चेहरे पर पहरे जरूर होता।
दर्द जब अपना अजीज खो देता,
प्रिय के विरह में जिन्दगी तन्हा होता।
लोग किसी वजह से अकेले रह जाता,
यूं अकेलेपन सबका अलग सा होता।
स्वरचित एवं मौलिक

गालिब तेरे जहाँ से प्यार मिट रहा है
चाहत का तेरी सारा संसार मिट रहा है
सबको पड़ी है अपनी और स्वार्थ पल रहा है
ना दिल मे प्यार है ना दिमाग मे रहा है।
ना आशिक ईमानदार है ना माशूक ईमानदार है आंखों मे भूख पैसे की ये दौर चल रहा है
बेईमानी पर टिका हुआ ये कारोबार चल रहा है
ना कोई कशक रही ना कोई तड़फ रहा है।
गालिब तेरे जहाँ से प्यार मिट रहा है
चाहत का तेरी सारा संसार मिट रहा है
मिलने की खुशामत नहीं आदेश चल रहा है
एक दूजे की लूट का दिमाग चल रहा है
प्यार रूठ जाए तो केक कट रहा है
यार छूट जाए तो जश्न मन रहा है।
आशिक भी है नशे मे माशूक भी है नशे मे
हर एक क्लब मे नशे का व्यापार पल रहा है
एक झलक को तरसे तुम अपने माशूक़ की
अब हर एक अंग अदा का दीदार चल रहा है।
गालिब तेरे जहाँ से प्यार मिट रहा है
चाहत का तेरी सारा संसार मिट रहा है

नौजवान आज नशे में अपने आपको खो रहा हैं, देखकर हमारा बुजुर्ग आज रो रहा है…।।
नशा एक चाकू के समान है, जो इंसान के अंदरूनी शरीर को काट देता है…।।

किसी और से नहीं वह खुद से लड़ रहा है, नशे का वह दोस्त जो बन रहा है…।।

नशा करके जो खुश होता है, जीवन भर फिर वह रोता है. “सत्य वचन“…।।

सुनो दोस्तों!! मैं बहुत खुश रहता हूँ, क्योंकि मैं नशा नहीं करता हूँ…।।

इस बुरे काम से मुँह मोड़ो, और यह नशा छोडो, यह नशा छोडो…।।

छा गया है मातम और वक़्त रो रहा है,
अरे देखो, ये मेरे समाज को क्या हो रहा है?

जम चुका है खून रगों में आज के नौजवानों के
मिल जाती है गिरी हुई जवानी, आजकल मयखानों में,
परिवार जाग रहा है राह तकते हुए
आने वाला कहीं सड़कों पे गिरा सो रहा है,
अरे देखो, ये मेरे समाज को क्या हो रहा है?

गिर गया है ज़मीर शानें ऊँची हैं
कल का क्या होगा ये बातें किसने सोचीं हैं,
चरस है, गांजा है, है भांग और हैरोइन यहाँ
यही है कारण जो देश को डूब रहा है,
अरे देखो, ये मेरे समाज को क्या हो रहा है?

विधवा हो रही हैं सुहागिनें, राखी पकड़ रोती हैं बहनें
माँ बाप का सहारा बनना था जिसको, वही बोझ बनता रहा है,
जल रहा है नशे की आग में घराने का इकलौता वारिस
बढ़ानी थी शान-ओ-शौकत जिसने वही कुल का नाम मिटा रहा है,
अरे देखो, ये मेरे समाज को क्या हो रहा है?

कदम बढ़ाना होगा कोई जो समाज को आगे बढ़ाना है
लक्ष्य यही रहे अपना, नशे को मार भगाना है,
जवानी वापस लानी है बिश्नोई समाज के नौजवानों की
हँसाना है हर उस शख्स को जो इस दर्द से रो रहा है,
अरे देखो, ये मेरे समाज को क्या हो रहा है?

यह नशे पर कविता पढ़ के अगर जरा सी बात आपके मन में आया तो कृपया इसे दूसरों तक भी शेयर करे।

मन में दबी आशायें
खुली आंखों से सपना
देखंने की आदत
मानव को नशा करने का
आदी बना देती हैं।
आकाश में उड़ने की
नाकाम कोशिश
पूरी जिंदगी बर्बादी से
सना देती हैं।
कहें दीपक बापू टूटते हुए
दौलत से ऊब रहे हैं,
बोतलों के नशे में डूब रहे हैं,
उनकी लाचारियां
दिवालियों को भी
दौलतमंद बना देती हैं।

Leave a Reply

error: Content is protected !!