5 कविता ज़िन्दगी पर दर्द भरी Sad poem on life

नमस्कार दोस्तों हमारे पास 5 जिंदगी पर दर्द भरी कविताएं शायरी हैं पहले के जमाने में किसी का दिल तोड़ना पाप समझा जाता था लेकिन आज कल की दुनिया में यह आम बात है

इसलिए हम लेकर आए हैं दुख भरी जिंदगी, दर्द भरी बातें ,रिश्तो की दर्द भरी शायरी, प्यार में दर्द भरी शायरी ,किसी की याद में दर्द भरी शायरी, दुख दर्द भरी शायरी ,लड़कों की शायरी, दर्द भरी

ज़िन्दगी पर दर्द भरी कविता

इतनी शिद्दत से शायद ही मैंने किसी को बुलाया हो
जितनी शिद्दत से तुझे बुला रही हूँ
आ मौत मुझे गले लगा
घुटन भरी जिंदगी से मुझे आज़ाद कर आज़ाद कर
अब और नहीं सहा जाता पीर
कि मुझ बेबस पर तरस खा
आ मौत मुझे गले लगा!!
पल पल बिखर रही
क्षण क्षण टूट रही
शब्दरूपी बाण छिद्र कर रहे मुझमें
जाने कब कौन और कैसे मेरे
अंग अंग को घायल कर रहा
कि कोई नहीं है जख्म सहलाने वाला
आ मौत आ मुझे गले लगा!!!
अब किसी से न रही कोई आस
हो गई हूँ मैं सब ओर से निराश
रो-रो कर सूज गई दोनों आंखें
अब नहीं सही जाती अघातें
दिल जार जार बेजार रो रहा
कि कोई नहीं है आँसू पोछने वाला
आ मौत आ मुझे गले लगा!!!
सही-गलत का हिसाब खत्म नहीं होता
क्यों पल पल दूँ मैं सही होने का प्रमाण
बिता दी ज़िन्दगी जिनके पीछे
वो भी अपने अपने न हुए
सपनों में मैं बस जीती रही
हकीकत में तो रोज़ मरती रही
कि कोई मरने पर भी रोने न आया
बड़ी शिद्दत से बुला रही
आ मौत आ मुझे गले लगा!!!
कभी थी मैं खूबसूरती की मूरत
आज तुम्हारे पीछे हो गई बदसूरत
त्याग दिया जिसके लिए अपना सर्वस्व
उस ज़िन्दगी ने भी तरस न खाया
गिनने बैठूँ तो हज़ार अपने निकलेंगे
लेकिन कोई मेरे कोमल मन को पढ़ न पाया
तिल तिल मर रही छोर दिया मरने को
किसी ने प्यार से सर न सहलाया
ऐ ज़िन्दगी मुझ पागल पर तरस खा
बड़ी शिद्दत से बुला रही
आ मौत आ मुझे गले लगा
आ मौत आ मुझे गले लगा!!!
✍️✍️✍️✍️✍️स्वरचित ” रमा भारती “✍️✍️✍️✍️✍️

रिश्तों की दर्द भरी शायरी

ज़िन्दगी धुलमधुल थी ,गरीबी के जमाने में ।
रोटी की किलत थी, ख़ाली पड़े खज़ाने में
दुःख छुपाकर मुस्कान थी, मज़ाक उड़ाते जमाने में !!
दिन भर की भागदौड़ में, कमर कड़कती थी आशियाने में
छोटी सी ज़मीन थी , हमारे खुशीयों के अफसानों में ।।
मां मन में चिलाती थी , आंधी और तूफ़ानों में !
तेज हवाएं दरवाज़ा खटखटाती, मन सिमटता जाता था
बिजली कड़कती ऐसे , कि घर में अंधेरा मचता जाता था ।।
बादल ऐसे बरसे , थकान दर्द भरा शरीर आराम को तरसे
सुबह दिन निकले , फ़िर भी उम्मीद हाथों से निकले !
चूल्हा भीगा , ईंधन भीगा बस मन उदास सा बिखले ।।
मन के सवाल बड़े थे ? ख़्वाब रहे हमेशा आजाद ।
कि उजड़े चमन के भी दिन, कभी तो होगे आबाद
चीजों को समेटती अकेली, खुद सब सहन करती थी !!
ख़ुद पर भरोसा रखा , आज ज़िंदगी का रहन बदल दिया
मां ने हमारे जीवन का हिस्सा ही खुशियों में बदल दिया ।।
कविता नहीं ये ज़ुबानी है ,
रजनी मिशाल की मां की यही कहानी है ।

प्यार में दर्द भरी शायरी हिंदी में

दिलों की धड़कन झेलती हार थी,
किस्मत भी तब बहुत लाचार थी,
जीत न सके धर्म के ठेकेदारों से,
फरेब की लगी लम्बी कतार थी।
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कोई क्या जाने अनसुलझे किस्से ,
जख्म लिखे थे जिन्दगी के हिस्से ,
जनाजा बन निकल पड़ी ख्वाहिशे ,
मोहब्बत के अश्क दर्द में ही पिस्से।
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मासूम शक्लों की परवाह किसे थी
जाति धर्म की आवाज बहुत थी,
मौन शब्दों की गुहार हर साँस में ,
मुझसे, हाँ मोहब्बत उसे भी थी ।
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मोहब्बत पर जुर्म जब बोला जाता,
धर्म की तराज़ू पर वह तौला जाता,
दफन रह जाता है राज वो दिल में,
जो सामने किसी के कभी नहीं खोला।
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आसमाँ से उतरती हुई ज्यों परी थी,
मजबूर अब तक वही टीस भरी थी,
नूरेजहाँ नाम बसाकर ही ख्यालों में,
मुझसे ,हाँ मोहब्बत उसे भी थी।

 

दुःख दर्द भरी शायरी
किसी फूल के पंखुडियों के टूटने का दर्द
महसूस किये हो कभी
नही न !
फिर कैसे समझोगे मुझे ?
सुबह के ओस के बूँदों के सूख जाने की वेदना को
समझ सके हो कभी
नहीं न !
फिर कैसे जानोगे मुझे ?
जानना है तो चलो मेरे साथ
तपती रेगिस्तान मे
आँखे भर की नमी ढूंढने
चलो ज्वालामुखी के अग्नि कुंडों मे
अंजुरी भर की खुशियाँ ढूँढने
कभी उन पगडंडियों पर चलो
जो कांटों भरी थी
और मैने तुम्हारे लिए
खुद को बिछा दिया था
हाँ …. मुझे समझना है तो प्रियवर
तुम्हे जानना होगा
यह ज़िन्दगी इतनी आसान नही थी !!!

जिन्दगी तो यूँ ही,
ऊपरवाले…
भगवान नाम के शायर की –
नज्म भरी किताब है,
गम है, दर्द है, शुकून है,
शिकवे शिकायतों भरी दास्तान….
गर जी लिये तो लाजवाब है;
और पग पग पर,
दर्द के दोहे,
गम की गजल के साथ,
कहीं शुकून के इस समंदर में,
उतर के भी देखो…
पा जाओगे,
जो वो खुदा का शबाब है।

 

 

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